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Walt Disney ke Success PRINCIPLES (Hindi Edition)

वाल्टर एलियास डिज्नी एक अमेरिकी उद्यमी, एनिमेटर, लेखक, वॉयस अभिनेता और फिल्म निर्माता थे। वे अमेरिकी एनिमेशन उद्योग के अग्रणी थे। उन्होंने कार्टून के उत्पादन में कई चमत्कार किए। एक फिल्म निर्माता के रूप में। उन्हें 59 बार ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया और उन्होंने 22 ऑस्कर जीते।
चाहे जो भी हो, बॉर्बी, डंबो, जंगल बुक, लाइन किंग, wall-e, अप, इन साइड आउट में से कोई-न-कोई मूवी हर किसी की जरूर पसंदीदा होगी, लेकिन ये सारी मूवी बनानेवाली कंपनी एक ही है और वह है वॉल्ट डिज्नी। यह कंपनी सन् 1923 में वाल्ट डिज्नी और रॉयल डिज्नी द्वारा स्थापित की गई और इसे ‘डिज्नी ब्रदर्स कार्टून स्टूडियो’ का नाम दिया गया। सन् 1928 से मिकी माउस का कार्टून स्टार्ट हुआ। डिज्नी की फर्स्ट मूवी ‘स्नो वाइट एंड सेवन डॉफ्स’ थी। मूवी जबरदस्त हिट हुई और उसने 40 करोड़ डॉलर से ऊपर की कमाई की। आज से काउंट करें तो 2 अरब से ज्यादा।
जब लोग आपसे कहें कि यह काम आप नहीं कर सकते, तो वही सही समय होता है उस काम को करने का। वॉल्ट डिज्नी अपनी जिंदगी में कई बार असफल हुए। उन्होंने लाफो ग्राम स्टूडियो कंपनी बनाई, जो कि बैंक करप्ट हो गई। उन्होंने अपना स्टूडियो खोला और सबकुछ खो दिया। उनके अगले प्रोजेक्ट को कोई भी फाइनेंस करने के लिए तैयार नहीं था। लोगों ने मिकी माउस कैरेक्टर को भी एक बेकार का विचार बताया। मगर वॉल्ट डिज्नी को अपने आप पर विश्वास था। उनकी सोच दुनिया की सोच से कहीं ज्यादा आगे थी। उनको अपने ड्रीम्स को लेकर एक कभी न टूटनेवाला विश्वास था, जो उन्होंने सच कर दिखाया।
वे बचपन में फर्श और दीवारों पर कुछ-न-कुछ हमेशा बनाते रहते थे। उन्हें ड्रॉइंग का बड़ा शौक था। एक बार उन्होंने अपनी छोटी बहन के साथ मिलकर तारकोल से अपने घर की दीवार पर पेंटिंग बना डाली और पूरी दीवार काली हो गई, जिसके लिए उन्हें बहुत डाँट सुननी पड़ी। उन्होंने सात साल की उम्र में अपने पड़ोसी के घोड़े की एक छवि बनाई। उनके पड़ोसी, जो एक रिटायर्ड डॉक्टर थे, वह उनको इतनी पसंद आई कि उन्होंने उसे पैसे देकर खरीद लिया। यह वॉल्ट डिज्नी के जीवन की पहली कमाई थी, लेकिन कमाई से ज्यादा जरूरी था इस खुशी का होना कि उस डॉक्टर के घर में उनकी बनाई हुई पेंटिंग टँगी थी।
यह बात सुनकर उनका दिल टूट गया, क्योंकि उन्होंने अपने पूरे जीवन में हर चीज से समझौता किया था, लेकिन ड्रॉइंग से कभी कोई समझौता नहीं किया था। अपने भाई के साथ 2,000 डॉलर की एक और कंपनी बनाई, जिसका नाम ‘डिज्नी ब्रदर्स स्टूडियो’ रखा। बाद में इसका नाम बदलकर ‘वॉल्ट डिज्नी’ कर दिया। यह बहुत जल्द चल पड़ी। 1928 में न्यूयॉर्क से कैलिफोर्निया जाते समय ट्रेन में कागज पर उन्होंने एक चूहे जैसा कुछ बनाया, जिसकी बड़ी-बड़ी आँखें थीं और बड़े-बड़े कान थे, जिसका नाम उन्होंने अपनी पत्नी के कहने पर ‘मिकी’ रखा और ‘मिकी माउस’ का जन्म हुआ। मिकी का विचार उन्हें अपने ऑफिस में घूमते चूहे से आया था। ‘मिकी माउस’ पहला बोलनेवाला कार्टून था। उसमें आवाज थी और उसके बाद कभी वॉल्ट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
वॉल्ट डिज्नी एक बेहतरीन प्रशिक्षक के साथ ही एक असाधारण कहानीकार थे। वह अपने कर्मचारियों को इतने बेहतरीन तरीके से कहानी सुनाते थे कि वे प्रभावित हो जाते और काम करने के लिए तैयार हो जाते। कहानी बताते वक्त वह हर पॉइंट को अच्छे से टच करते थे। वह अलग-अलग कैरेक्टर्स को एक्ट करते, अलग-अलग आवाजें निकालते और समझाते थे। उनके पास अपने से ज्यादा प्रतिभाशाली लोगों को हायर करने का कौशल था। काम के साथ-साथ उनके ऑफिस में कर्मचारियों की संख्या बढ़ती गई—100 से 200, फिर 1,200 हो गई। वह काम से कभी समझौता नहीं करते थे।


Steps to Get Walt Disney ke Success PRINCIPLES (Hindi Edition).